चीन में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के वाइस चेयरमैन झांग यूक्सिया के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन पर चीन के न्यूक्लियर हथियार से जुड़ी सीक्रेट जानकारी अमेरिका को लीक करने का आरोप है। झांग को 24 जनवरी को पद से हटाया गया था। चीनी रक्षा मंत्रालय ने उन पर अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। झांग पर CMC के अंदर अपनी अलग गुटबाजी करने और पार्टी में फूट डालने का भी आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन के पूर्व जनरल मैनेजर गु जून ने झांग के खिलाफ कुछ सबूत दिए हैं। गु जून पर भी कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ अपराधों के लिए जांच चल रही है। झांग ने राष्ट्रपति बनने में जिनपिंग की मदद की थी जिनपिंग को 2023 में तीसरी बार राष्ट्रपति बनाने में जनरल झांग ने मदद की थी, लेकिन फिर उनके जिनपिंग से मतभेद गहरे होते गए। अब तक झांग ही PLA में बड़े फैसले ले रहे थे। जनरल झांग और CMC के एक और जनरल लियू कई महीनों से कम्युनिस्ट पार्टी की बैठकों से गायब रहने लगे। झांग पहले भी कई बार गायब हो चुके थे। चीन में ऐसा तब होता है, जब किसी ऑफिसर को हटाया जाना होता है या उसकी जिनपिंग से वफादारी पर संदेह खड़ा होता है। 24 जनवरी 2026 को झांग के खिलाफ ‘पार्टी के कानून और अनुशासन के उल्लंघन’ का आरोप लगा और उनके खिलाफ जांच शुरू हुई। चीन में भ्रष्टाचार और टॉप लीडरशिप के प्रति वफादारी न दिखाने पर ऐसे ही आरोपों के तहत जांच शुरू की जाती है। कई ऑफिसर इस जांच के पहले ही गायब हो जाते हैं या पद से हटा दिए जाते हैं। ऐसा बहुत कम होता है कि चीन में किसी ऑफिसर के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जांच शुरू हो और वह बाद में निर्दोष साबित हो जाए। झांग से पहले भी कई ऑफिसर इसी तरह हटाए गए हैं। झांग की गिरफ्तारी पर सवाल उठे झांग की गिरफ्तारी के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शी जिनपिंग ने अपने इतने करीबी सहयोगी के खिलाफ एक्शन क्यों लिया। न्यूक्लियर सीक्रेट लीक करने के आरोपों से अलग कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि झांग बहुत ज्यादा ताकतवर हो गए थे। वहीं कुछ का कहना है कि शी को लगा कि सेना में भ्रष्टाचार इतना गहरा है कि बड़े स्तर पर सख्त कदम जरूरी है। शी जिनपिंग और जनरल झांग दोनों ही ‘प्रिंसलिंग’ माने जाते हैं, यानी ऐसे नेता जिनके पिता माओ त्से तुंग के दौर के क्रांतिकारी थे। झांग के पिता और शी जिनपिंग के पिता साथ काम कर चुके थे। माना जाता है कि इसी बैकग्राउंड ने दोनों के रिश्ते मजबूत किए। 2012 से 2017 तक झांग चीन के हथियार खरीद विभाग के प्रमुख रहे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह विभाग भ्रष्टाचार के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। इस विभाग से जुड़े कई अधिकारी बाद में भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसे, लेकिन झांग अब तक बचे हुए थे। अब अगर जनरल झांग पर औपचारिक आरोप तय होते हैं, तो उनका गुप्त सैन्य अदालत में मुकदमा चल सकता है। ऐसे मामलों में सजा तय मानी जाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस घटना से बीजिंग की सत्ता व्यवस्था में डर का माहौल बनेगा। मैसेज साफ है कि शी जिनपिंग के सबसे करीबी लोग भी सुरक्षित नहीं हैं। 2027 में होने वाली पार्टी कांग्रेस से पहले शी को सेना में भरोसेमंद नेतृत्व फिर से खड़ा करना होगा, जो उनके लिए आसान नहीं होगा। चीन-वियतनाम जंग में मोर्चे पर भेजे गए थे जनरल झांग जनरल झांग चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के एक वरिष्ठ जनरल हैं। जनवरी 2026 तक वे सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के पहले रैंक वाले उपाध्यक्ष थे, जो चीन की सेना का सबसे ऊंची कमांड बॉडी है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद CMC के चेयरमैन हैं, इसलिए झांग उनके ठीक नीचे सबसे पावरफुल सैन्य अधिकारी माने जाते थे। चीनी क्रांति के दौरान के एलीट क्लास के नेता और टॉप सैन्य अफसरों के बेटों को ‘प्रिंसलिंग’ यानी ‘छोटा राजकुमार’ कहा जाता है। झांग भी ऐसे ही एलीट क्लास के एक राजकुमार थे। 18 साल की उम्र में झांग चीनी सेना में शामिल हुए। 2020 में झांग 70 साल के हो गए, ये चीन में आर्मी ऑफिसर्स के रिटायर होने की उम्र होती है, लेकिन जिनपिंग ने उन्हें पद पर बनाए रखा। शी जिनपिंग के करीबी जनरल भी पद से हटाए गए थे अक्टूबर 2024 में पार्टी ने CMC के दूसरे उपाध्यक्ष हे वीडोंग को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। 2024 में दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को भी भ्रष्टाचार के मामलों में पार्टी से बाहर किया गया था। हे वीडोंग चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के दूसरे नंबर के वाइस चेयरमैन थे, जो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में दूसरा बड़ा पद है। यह कमीशन राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में सेना की सर्वोच्च कमान संभालता है। वे मार्च 2025 से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। हे वीडोंग को शी जिनपिंग का करीबी सहयोगी माना जाता है। दोनों ने 1990 के दशक में फुजियान और झेजियांग प्रांतों में साथ काम किया था। हे को 2022 में सीधे CMC के उपाध्यक्ष का पद दिया गया था, जो आमतौर पर हाई कमिशन में सर्विस के बाद ही मिलता है। झांग का हटाया जाना बाकी जनरलों से अलग न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक जनरल झांग को हटाया जाना बाकी जनरलों से अलग माना जा रहा है। बीते तीन साल में शी जिनपिंग ने भ्रष्टाचार और कथित वफादारी की कमी के आरोप में कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाया है, लेकिन झांग का मामला कहीं ज्यादा बड़ा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक झांग की बर्खास्तगी की यह घटना चीन की सत्ता व्यवस्था के लिए ‘भूकंप’ जैसी है। शी जिनपिंग चाहें तो 75 साल के जनरल झांग को चुपचाप रिटायर कर सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। चीनी सेना के अखबार लिबरेशन आर्मी डेली में छपे एक संपादकीय में इशारा किया गया कि झांग पर सिर्फ भ्रष्टाचार ही नहीं, बल्कि शी जिनपिंग के प्रति वफादारी न रखने का भी आरोप है। संपादकीय में कहा गया कि जनरल झांग और उनके साथ हटाए गए एक अन्य कमांडर ल्यू झेनली ने शी जिनपिंग के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश की और सेना पर कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण को नुकसान पहुंचाया। इससे सेना की राजनीतिक स्थिरता और युद्ध की तैयारी पर बुरा असर पड़ा। चीनी प्रवक्ता बोले- भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि यह जांच दिखाती है कि पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कार्रवाई चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के नेतृत्व में चल रही उस मुहिम का हिस्सा है, जिसका मकसद सेना में सुधार के साथ अफसरों में वफादारी बढ़ाना है। चीनी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कमीशन के एक अन्य सदस्य और जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख ल्यू झेनली को भी जांच के दायरे में रखा गया है। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन सेना से जुड़े बड़े फैसले लेने वाली संस्था है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस संस्था के सबसे बड़े अधिकारी हैं। रक्षा मंत्री पर भी लगा था भ्रष्टाचार का आरोप राष्ट्रपति बनने के बाद से ही शी जिनपिंग सेना में फैले भ्रष्टाचार की रोकथाम में लगे हैं। साल 2204 में चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन का भी एंटी करप्शन ड्राइव में नाम आया था, इसके बाद उनके खिलाफ जांच बैठाई गई थी। इससे पहले दो पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू और वेई फेंगहे को पद से हटा दिया गया था। चीन लगातार अपनी सेना को आधुनिक बना रहा चीन लगातार अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है। चीन ने इस साल के अपने सालाना रक्षा बजट में 7.2% की बढ़त की है। इस साल यह 249 अरब डॉलर (1.78 ट्रिलियन युआन) हो गया। यह भारत के 79 अरब डॉलर के सैन्य बजट के मुकाबले करीब 3 गुना है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि चीन का वास्तविक डिफेंस खर्च उसकी तरफ से बताए गए खर्च से 40-50% ज्यादा है। चीन अपने सैन्य खर्च को कम दिखाने के लिए अलग-अलग सेक्टर के तहत धन आवंटित करता है। चीन अमेरिका के बाद सेना पर सबसे ज्यादा खर्च करता है। अमेरिका का रक्षा बजट 950 अरब डॉलर के करीब है। जो चीन के बजट से 4 गुना है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प की 100% टैरिफ धमकी पर कनाडाई पीएम की सफाई: बोले- चीन के करीब नहीं जा रहे; हमारे बीच कोई फ्री-ट्रेड एग्रीमेंट नहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोमवार को कहा है कि उनकी सरकार चीन के साथ किसी भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर काम नहीं कर रही है। उन्होंने 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